जिसको देखना हो अब देख लीजिए फिर मत बोलना कि पोस्ट में वनस्पतियों की फोटो नहीं डालते और ये मत कहना कि वृक्ष की फोटो भेज देते तो पहचान करने के लिए उत्तम रहता तो जानकारी के लिए बता दें की ये जड़ और लकड़ी मेरे मित्र गण भेजते हैं उत्तराखंड से जहां से ये पौधा प्राप्त करते हैं वहां फोटो लेना संभव नहीं है ये नियम वनविभाग का है और उत्तराखंड से यहां तक आने में जड़े सुख गई है अतः ये दुर्लभ और चमत्कारिक वनस्पति का दर्शन कर लीजिए।
विद्यादल नामकी इस वनस्पति की जड़ को हमेशा जेब में रखा जाता है जो संकट के समय बचाता है। गाँव के लोग इस वनस्पति को अति शुभ मानते हैं। इसके फूलों को कान में लटका करके भी यात्रा में जाया जाता है। संकट से बचाव होता है।
1. इसकी एक वीता लकड़ी घर के मुख्य द्वार के ऊपर लगाया भी जाता है। जो अतृप्त आत्माओं का प्रवेश नहीं होता है।
हनुमान मंत्र और नृसिंह मंत्र से अभिमंत्रित करके सिन्दूर लेपित करके स्थापित करें
2. मान्यता है कि इसकी जड़ को पीसकर माथे पर लगाने से देवभूत दिखाई देता है।
ऋषि गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करके एक रंग की गाय के दूध में घिस कर तिलक धारण करें।
3. छोटे बच्चों की रक्षा के लिए इसकी काष्ठ का ताबिज पहनाया जाता है।
गुरु गोरक्ष नाथ जी रचित अघोर गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करके दांई भुजा पर धारण करें।
4. यदि किसी कन्या के विवाह में देरी हो रही है तो इसकी जड़ ताबिज में भरकर धारण करें। विवाह का दोष कुछ ही दिन में समाप्त होता है।
गौरी मंत्र से अभिमंत्रित करके धारण करें।
5. इसकी जड़ दिपावली की रात लाकर इसे महालक्ष्मी के कवच से अभिमंत्रित करके रखा जाता है। धनवृद्धि अवश्य होती है।
गुरु गोरक्ष नाथ जी रचित लक्ष्मी अढ़ैया शाबर मंत्र से अभिमंत्रित करके सिन्दूर लेपित करके प्रतिष्ठित करें।
6. यदि शत्रु पीछा नहीं छोड़ रहा है तो इसकी जड़ मंगलवार की रात शत्रु के मकान में फेंकें। अवश्य लाभ होता है।
नृसिंह मंत्र से अभिमंत्रित करके शनिवार के दिन खर समय फेंक देना चाहिए।
7. इसके 11 बीज हमेशा जेब में रखने से आकस्मिक धन आगमन होता है तथा पति पत्नी मतभेद नष्ट करता है।
गुरु गोरक्ष नाथ जी रचित कुबेर भण्डारी गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करके जेब अथवा तिजोरी या गल्ले में रखें।
8. इस वनस्पति को घर आँगन में लगाना अति मंगलकारी है। घर के वास्तुदोषों को नष्ट करने में सहायता करता है।
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श्री नाथजी गुरूजी
की चरण कमल पादुका
को आदेश
ओम् शिव गोरक्ष योगी
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