आठ साल की उम्र में 'पैड' संभालती हुई आपकी बेटी
ये तरक्की है या अंत?
माँ-बाप अपनी आठ साला बेटी को लेकर परेशान हैं। बच्ची के एक हाथ में अब भी उसकी पसंदीदा गुड़िया हैं। और दूसरी तरफ माँ की आँखों में आँसू।
शिकायत क्या हैं?
"डॉक्टर साहब, इसे माहवारी (Periods) शुरू हो गई है।"
ये पढ़कर आपका दिल दहल गया ना?
जिस उम्र में बच्चियों को रस्सी कूदनी चाहिए, उस उम्र में इन नन्हे पंछियों को सैनिटरी पैड्ज और पेट के दर्द संभालने पड़ रहे हैं।
मां मुझे खून क्यों आ रहा है?"
8, 9 साल की बच्ची का ये सवाल सुनकर उस माँ का कलेजा फट गया था... और एक डॉक्टर का दिमाग़ सुन्न हो गया था।
क्या ये बचपन छीन लेना नहीं है तो और क्या है?
हम अपने बच्चों को पाल नहीं रहे, हम उन्हें फुला रहे हैं।
जिस तरह पोल्ट्री फार्म में इंजेक्शन देकर 40 दिन में 'ब्रायलर मुर्गी' तैयार की जाती है, कुछ वैसी ही हालत आज हमने अपनी औलाद की कर दी है। ये मजा नहीं, ये जिस्म की सूजन है!
इसका जिम्मेदार कौन है?
हमारी 'मॉडर्न' लाइफ स्टाइल ,पसंद और सोच!
देखें हम सीधे तौर पर उनकी जिंदगी से कैसे खेल रहे हैं:
🍕 500 रुपये का पीजा या जिन्दगी का अंत ?
वीक एंड पर मॉल में 500-800 रुपये का पीज़ा/बर्गर खाते हुए आप तस्वीर खींचकर इंस्टाग्राम पर डालते हैं... "फैमिली टाइम!"
अरे, ये फैमिली टाइम नहीं, ये आपके बच्चों की सेहत की बर्बादी है! रबड़ जैसे मैदे और प्रोसेस्ड चीज़ का ये खाना हार्मोन खत्म करने की फ़ैक्ट्री है।
जिस्म में जितनी ज़्यादा चर्बी, उतना ही ज़्यादा एस्ट्रोजन बनता है। और यही ज्यादा हार्मोन उस 8 साला बच्ची के नाजुक दिमाग को संदेश देता है:
"बच्ची, तुम्हारा बचपन खत्म, अब तुम औरत हो!"
🥡 गर्म खाने के लिए प्लास्टिक का डब्बा?
स्टील का डब्बा भारी लगता है और प्लास्टिक का फैंसी, इसलिए वही बच्चों को दे रहे हो?
जब आप इसमें भाप उड़ाती गर्म सब्जी रखते हैं तो इसमें मौजूद जेनो-एस्ट्रोजन्ज (Xenoestrogens) खाने में शामिल हो जाते हैं। ये केमिकल जिस्म में जाकर बहरूपिए की तरह काम करते हैं। जिस्म को लगता है कि ये एस्ट्रोजन है, और जिस्म समय से पहले बालिग़ होने लगता है।
आपकी 'फैंसी' आदत ने क़ुदरती घड़ी ही बिगाड़ दी है!
🍗 दूध-चिकन या 'हार्मोनल बम'?
"डॉक्टर, बच्ची बहुत दुबली है, नॉन-वेज दें? दूध कितना पिलाएँ?"
खिलाएँ जरूर, मगर बाज़ार का वो 40 दिन में फूला हुआ ब्रायलर चिकन और थैली का 'केमियाई' दूध देते वक्त सौ बार सोचें।
चिकन: मुर्ग़ी को जल्दी बड़ा करने के लिए ग्रोथ हार्मोन्ज के भारी डोज दिए जाते हैं। वही हार्मोन बच्ची के पेट में जाते हैं। इसी लिए आजकल चौथी जमाअत की बच्चियों के होंटों पर बाल (Facial Hair) आ रहे हैं। ये PCOD की पहली अलामत है!
दूध: गाय-भैंस को ज़्यादा दूध के लिए दिए गए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन दूध के ज़रीए आपकी बच्ची के नन्हे से रहम को "बड़ा होने" के ग़लत सिग्नल देते हैं।
जिन चीजों को आप 'प्रोटीन' समझकर खिला रहे हैं, वो दरअस्ल हार्मोनल बम हैं!
💉 सब से खौफनाक हकीकत -
इस उम्र में माहवारी शुरू हो जाए तो हड्डियाँ जल्दी जुड़ जाती हैं और क़द हमेशा के लिए रुक जाता है। इसे रोकने के लिए फिर क्या करना पड़ता है?
"हार्मोन सप्रेशन थेरेपी!"
ज़रा प्रतिक्षा करें...
उस 8 साला नाज़ुक फूल को, अपनी माहवारी रोकने के लिए अगले 3-4 साल तक हर महीने एक तकलीफ़देह, मोटे इंजेक्शन की सुई लगवानी पड़ेगी!
आपकी लाड़ली बेटी हर महीने उस सुई के ख़ौफ़ से काँपेगी, और आप बेबस होकर ये सब देखेंगे।
सोचिए......
10 साल बाद जब वो आपसे पूछेगी:
"मां, तब क्यों ध्यान नहीं दिया? क्या वो पीज़ा-बर्गर मेरी ज़िंदगी से ज्यादा अहम थे?"
तो आपके पास क्या जवाब होगा?
अभी भी वक्त हाथ से नहीं निकला... सुधर जाओ!
1. किचन से 'सफेद जहर' (मैदा, चीनी) बाहर फेंक दें।
2. प्लास्टिक के डब्बों को आग लगा दें: सिर्फ़ स्टील इस्तेमाल करें।
3. बच्चों को 'ब्रायलर' न बनाएँ: उन्हें मिट्टी में खेलने दें, धूप में दौड़ने दें।
4. लाड़-प्यार का मतलब जहर खिलाना नहीं, ये फालतू के काम अब बंद करें!
इस संदेश को पढ़कर भूल मत जाना। ये संदेश हर फैमिली ग्रुप तक पहुँचाना आपका पहला फर्ज है।
अपनी बेटियों का बचपन बचाने के लिए ये कदम उठाना ही होगा।
क्या आपके आस-पास भी ऐसी चीजें नजर आती है?
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वयं राष्ट्रे जागृयाम
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