(जिन्होंने तंत्र के इस मार्ग पर कदम नहीं रखा, वे आगे न पढ़ें।)
15 वर्षों से अधिक समय तक मैंने विभिन्न गुप्त पीठों में, श्मशान के अंधेरे कोनों में, और निर्जन पहाड़ी गुफाओं में माँ काली की साधना की है। कई बार ऐसी रातें आईं जब लगता था कि अब शरीर छूट जाएगा... और कई बार ऐसा भी हुआ कि मैं स्वयं को पहचान ही नहीं पाया।
आज मैं उन सात असाधारण आंतरिक अनुभवों का वर्णन कर रहा हूँ जो सच्ची काली-साधना के गहन स्तर पर लगभग हर साधक को होने अनिवार्य हैं। ये अनुभव न तो सुखद हैं, न ही साधारण... ये मृत्यु और महामृत्यु के बीच का वह सूक्ष्म द्वार हैं जहाँ से होकर गुजरना पड़ता है।
1. हृदय में काले शून्य का उदय
अचानक ऐसा लगता है जैसे हृदय के ठीक मध्य में एक काला, जीवित शून्य साँस ले रहा हो। धड़कनें रुकती नहीं, पर ध्वनि गायब हो जाती है।
तांत्रिक रहस्य — यह माँ का मूल शून्य-बीज है जो व्यक्तित्व को ग्रसने आता है।
खतरा — अहंकार का भयंकर प्रतिरोध, पागलपन या आत्महत्या के विचार।
👉 सूक्ष्म उपाय — बिना किसी भाव के केवल “हूँ” का जाप, और मृत्यु को साक्षी बनाकर देखना।
2. नेत्रों के पीछे लाल-काली ज्वाला
आँखें बंद करने पर भीतर एक ऐसी अग्नि जलती दिखती है जो न जलती है, न बुझती है... और उसमें माँ का विकट हास्य सुनाई देता है।
रहस्य — यह चक्षु-कुंडलिनी का प्रथम स्पर्श है, जहाँ माँ स्वयं नेत्र बनकर देखती हैं।
खतरा — नेत्रों में रक्तस्राव, भयानक सिरदर्द, या स्थायी दृष्टि-भ्रम।
👉 उपाय — तीसरी आँख पर लगातार “क्रीं” का स्पर्श-जाप और शीतल जल से नेत्र-सेचन।
3. शरीर का अस्थायी विलय – मैं नहीं रहा
अचानक ऐसा लगता है जैसे पूरा शरीर रेत की तरह बिखरकर शून्य में विलीन हो गया। न हाथ, न पैर, न साँस... केवल चेतना बची है।
रहस्य — देह-भान का पूर्ण नाश, जो महाकाल का पहला स्पर्श है।
खतरा — शरीर छोड़ने की इच्छा, या वापस लौटने में असमर्थता (प्राण-मोक्ष)।
👉 उपाय — गुरु-मंत्र का अंतिम स्मरण और माँ के चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव।
4. श्मशान की साँसें भीतर से सुनाई देना
साधना के दौरान अचानक भीतर से सैकड़ों प्रेतों, चुड़ैलों और अगोचर शक्तियों की साँसें, हँसी और कराह सुनाई देने लगती हैं।
रहस्य — यह भूत-प्रेत-लोक और माँ के भैरवी रूप का संधि-स्थल है।
खतरा — भय से साधक का प्राण निकल सकता है या वह उनमें से एक बन सकता है।
👉 उपाय — केवल एक ही मंत्र — “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” का अटल जाप।
5. माँ का स्पर्श – हड्डियों में बिजली का संचार
रीढ़ की हड्डी से एक ऐसी शक्ति ऊपर चढ़ती है जो लगता है हड्डियाँ ही टूट रही हैं। साथ में माँ के नाखूनों का स्पर्श महसूस होता है।
रहस्य — सुषुम्ना में महाकाली का प्रथम प्रवेश।
खतरा — प्रचंड कंपन, हृदयाघात जैसा अनुभव या स्थायी तंत्रिका क्षति।
👉 उपाय — शवासन में लेटकर माँ को ही अपनी रीढ़ मान लेना और “माँ... माँ...” का केवल मनन।
6. काल-चक्र का भ्रमण – समय रुकता है, फिर उल्टा चलता है
समय का भान समाप्त हो जाता है। कभी लगता है बचपन में लौट गए, कभी लगता है मृत्यु हो चुकी।
रहस्य — काल और काली एक हैं — यह उनका प्रत्यक्ष दर्शन है।
खतरा — समय-बोध का पूर्ण विनाश, साधक वर्तमान में नहीं रह पाता।
👉 उपाय — प्रत्येक अनुभव के बाद “अहं कालिकेयं” का उच्चारण कर वर्तमान में लौटना।
7. पूर्ण ग्रहण – मैं माँ बन गया, माँ मैं बन गई
अंतिम अनुभव जहाँ साधक और साध्य, भक्त और देवी, जीव और शिव एकाकार हो जाते हैं।
रहस्य — यह महाविद्या का पूर्ण आत्मसात है।
खतरा — यदि अहंकार का सूक्ष्म अंश भी बचा तो स्थायी पागलपन या मृत्यु।
👉 उपाय — कोई उपाय नहीं। केवल पूर्ण समर्पण। जो बच गया, वही लौट पाता है।
ये सात अनुभव कोई कहानी नहीं... ये वे द्वार हैं जिनसे गुजरकर ही साधक माँ के वास्तविक पुत्र/पुत्री बनता है।
शेष जीवन उनके चरणों में दास्य ही रहता है।
जो इस मार्ग पर चलने का साहस रखते हैं, उन्हें माँ स्वयं बुलाती हैं।।जो डरते हैं, उनके लिए यह पोस्ट केवल एक भयावह सपना है।
जय माँ महाकाली। जय मां भैरवी
जय श्मशान-वासिनी
(यह लेख केवल उन साधकों के लिए है जिन्हें गुरु की दीक्षा प्राप्त है। बिना मार्गदर्शन के इन अनुभवों को आमंत्रित करना मृत्यु को न्योता देना है।)
श्री सीताराम विजयते।
साभार - तंत्र महाविज्ञान गुप्त रहस्यमय तंत्र साधना
तंत्र महाविज्ञान संस्था मध्यप्रदेश अघोरतंत्र रहस्य गुप्त अघोर रहस्य
संपर्क सूत्र।
पूजा जी 9111610710
संजील जी 7665650133
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