यह केवल ढाल के पीछे छिपना नहीं था, बल्कि यह आने वाली ऊर्जा (तरंग) को दूसरी ऊर्जा से काटकर बेअसर करने का विज्ञान था। यहाँ कुछ प्रमुख प्राचीन रक्षा तकनीकें और उनकी आधुनिक विज्ञान से तुलना दी गई है:
1. प्रत्यस्त्र सिद्धांत (The Concept of Interceptors)
युद्ध में नियम था कि हर अस्त्र का एक "काट" (Counter) होता था। एक विशिष्ट आवृत्ति (Frequency) की तरंग को शांत करने के लिए विपरीत प्रकृति की तरंग छोड़ी जाती थी।
* वरुणास्त्र बनाम आग्नेयास्त्र:
जब कोई आग्नेयास्त्र (Fire/Heat weapon) चलाता था, तो उसे रोकने के लिए वरुणास्त्र (Water/Cooling weapon) का प्रयोग होता था।
* आधुनिक तुलना: यह आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400 या Iron Dome) जैसा है। जैसे ही रडार दुश्मन की मिसाइल (ऊर्जा) को आते देखता है, वह उसे हवा में ही नष्ट करने के लिए अपनी 'एंटी-मिसाइल' छोड़ देता है।
2. ब्रह्मदंड: ऊर्जा का अवशोषण (Energy Absorption)
यह रक्षा की सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली तकनीक थी। महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र के युद्ध में इसका वर्णन मिलता है।
* विवरण: जब विश्वामित्र ने वशिष्ठ पर घातक से घातक अस्त्र (यहाँ तक कि ब्रह्मास्त्र भी) चलाए, तो वशिष्ठ ने 'ब्रह्मदंड' को अपने सामने रख दिया। इस दंड ने सारे अस्त्रों की ऊर्जा को अपने भीतर सोख (Absorb) लिया।
* आधुनिक तुलना: विज्ञान में इसे 'ब्लैक बॉडी' (Black Body) या 'एनर्जी सिंक' (Energy Sink) की अवधारणा कहा जा सकता है। एक ऐसा कवच जो ऊर्जा को टकराकर वापस नहीं भेजता, बल्कि उसे पूरी तरह निगल लेता है ताकि कोई विस्फोट न हो। आधुनिक 'रिएक्टिव आर्मर' (Reactive Armor) इसका एक छोटा रूप है जो हमले की ऊर्जा को सोखने की कोशिश करता है।
3. माया और अंतर्धान (Stealth and Jamming)
रामायण और महाभारत, विशेषकर मेघनाद और घटोत्कच के युद्धों में 'माया' का बहुत प्रयोग होता था।
* विवरण: योद्धा अदृश्य हो जाते थे या अपने जैसे कई नकली रूप बना लेते थे ताकि अस्त्र (जो अक्सर ध्वनि या मंत्र से निर्देशित होते थे) अपने लक्ष्य को पहचान न सकें (Target Lock Failure)।
* आधुनिक तुलना: यह आज की स्टील्थ टेक्नोलॉजी (Stealth Technology) और रडार जैमिंग (Radar Jamming) है। विमान ऐसे पदार्थों से रंगे जाते हैं कि वे रडार की तरंगों को चकमा दे सकें। साथ ही 'Decoys' (नकली लक्ष्य) छोड़े जाते हैं ताकि मिसाइल असली जहाज को छोड़कर नकली पर हमला करे।
4. सम्मोहन और सुरक्षा कवच (Bio-Metric Defense)
कुछ कवच ऐसे थे जो शरीर से अलग नहीं किए जा सकते थे, जैसे कर्ण के कवच-कुंडल।
* विवरण: यह केवल धातु का टुकड़ा नहीं था, बल्कि एक 'ऊर्जा क्षेत्र' (Energy Field) था जो जन्मजात था। इसे भेदा नहीं जा सकता था।
* आधुनिक तुलना: वैज्ञानिक आज 'फोर्स फील्ड' (Force Fields) या 'प्लाज्मा शील्ड' पर शोध कर रहे हैं—ऊर्जा की एक ऐसी दीवार जो किसी भी भौतिक वस्तु या लेजर को रोक सके।
5. उपसंहार अस्त्र (Deactivation Codes)
सबसे महत्वपूर्ण तकनीक थी अस्त्र को वापस बुलाना या शांत करना।
* विवरण: अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र चला तो दिया, लेकिन उसे 'उपसंहार' (वापस बुलाने की विधि) नहीं पता था, जबकि अर्जुन को पता था। इसका मतलब है कि अस्त्रों में एक 'सेल्फ-डिस्ट्रक्ट' या 'डीएक्टिवेशन कोड' होता था।
* आधुनिक तुलना: आज के परमाणु हथियारों या गाइडेड मिसाइलों में 'Abort Codes' होते हैं। अगर गलती से मिसाइल लॉन्च हो जाए, तो उसे रास्ते में ही निष्क्रिय करने का कोड भेजा जा सकता है।
निष्कर्ष:
प्राचीन 'प्रत्यस्त्र' विज्ञान हमें बताता है कि ऊर्जा को केवल ऊर्जा से ही काटा जा सकता है। उन्होंने पदार्थ (Matter) की लड़ाई को ऊर्जा (Energy) के स्तर पर ले जाकर लड़ा था।🚩🙏
साभार - निसर्गम ( ललितपुर )
संदर्भ - https://www.facebook.com/100063631664043/posts/1506336624830712/?mibextid=rS40aB7S9Ucbxw6v
वयं राष्ट्रे जागृयाम
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