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Sunday, 21 December 2025

“गुरुजी हमें अच्छा मनुष्य बनना सिखाते हैं...!!

दरवाजा खुला…
और कमरे में जैसे हवा रुक गई।
जिस महिला को पूरा शहर सलाम ठोकता था, वही अचानक सिर झुकाए खड़ी थी—
नजरें जमीन पर, हाथ काँपते हुए…
और सामने खड़ा था एक साधारण-सा आदमी, चश्मा लगाए, सादी शर्ट में—एक स्कूल टीचर...!!

कोई समझ नहीं पा रहा था…
यह वही आर्या वर्मा थी? देश की सबसे तेज तर्रार IAS अफसर?
जिसका नाम सुनकर मंत्री भी सीधा बैठ जाते थे?..??

आर्या वर्मा की कहानी अखबारों की सुर्खियाँ थी।
कम उम्र में UPSC, पहली पोस्टिंग में ही बड़े घोटाले का खुलासा, और फिर—एक असफल शादी।
पति भी IAS था, लेकिन अहंकार और शक ने रिश्ता तोड़ दिया।
तलाक के बाद आर्या ने खुद को पत्थर बना लिया था—ना रिश्ते, ना आँसू...!!

उसे लगता था,
कमजोरी दिखाना हार है...!!

आज उसे अपने ही शहर के एक सरकारी स्कूल में आना पड़ा था।
एक शिकायत आई थी
“एक टीचर बच्चों को गलत इतिहास पढ़ा रहा है...!!

आर्या सख्त थी।
गलत तो गलत—चाहे सामने कोई भी हो...!;

जब वह क्लासरूम में दाखिल हुई,
तो बच्चों के बीच खड़ा आदमी पलटा…
और उसकी नजरें वहीं ठहर गईं...!!

आदित्य।

उसका पहला प्यार।
वही, जिसे उसने IAS बनने की दौड़ में पीछे छोड़ दिया था।
वही, जिसने कहा था—
“तुम अफसर बन जाओ, मैं यहीं बच्चों को पढ़ा लूँगा...!!

और आज…
वह स्कूल टीचर था।
वह जिला कलेक्टर...!!

आर्या ने औपचारिक आवाज में पूछा,
“आप पर शिकायत है। क्या कहना चाहेंगे?...??

आदित्य मुस्कराया।
वही पुरानी सादगी...!!

“मैडम, मैं बच्चों को सच पढ़ाता हूँ।
कागजों में जो लिखा है, वो नहीं—जो मानवीय गुण सिखाए...!!

आर्या को गुस्सा आया।
“आप नियम तोड़ रहे हैं...!!

आदित्य ने धीरे से कहा,
“कभी-कभी नियम मनुष्य से छोटे होते हैं, आर्या...!!

उसका नाम…
सालों बाद किसी ने इस लहजे में लिया था...!;

जांच शुरू हुई।
फाइलें, बयान, सवाल-जवाब..!!

लेकिन हर बच्चा एक ही बात कह रहा था
“गुरुजी हमें अच्छा मनुष्य बनना सिखाते हैं...!!"

आर्या उलझन में थी।
कानून कहता था—कार्रवाई करो।
दिल कहता था—रुको...!!

शाम को स्टाफ रूम में,
आर्या ने आखिरी सवाल पूछा,
“आदित्य, तुमने कभी मुझसे शिकायत क्यों नहीं की?
मैंने तुम्हें छोड़ दिया… बिना जवाब...!!

आदित्य की आँखें नम हो गईं।
“क्योंकि तुम सपनों के पीछे नहीं भाग रही थीं…
तुम देश के लिए दौड़ रही थीं...!!

फिर उसने जेब से एक पुराना कागज निकाला।
पीला पड़ चुका था...!!

“ये क्या है?” आर्या ने पूछा...!!

“तुम्हारा पहला इंटरव्यू लेटर।
तुम रो रही थीं…
मैंने वादा किया था—
अगर तुम कभी गिरो, तो मैं तुम्हारी ढ़ाल बनूँगा...!!

तभी एक चपरासी अंदर आया।
“मैडम, बच्चों के मिड-डे मील का पैसा तीन महीने से रुका है...!;

आदित्य बोला,
“मैंने अपने वेतन से बच्चों को खिलाया।
क्योंकि भूखा बच्चा इतिहास नहीं समझ सकता...!!

आर्या की आँखें भर आईं...!;

अगले दिन…
पूरे स्टाफ के सामने,
जिला कलेक्टर आर्या वर्मा—
उस टीचर के सामने खड़ी थी...!;

और अचानक…
उसने सिर झुका दिया...!!

कहा,
“आदित्य…
मैं अफसर बन गई,
पर मनुष्य तुम बने रहे...!!

कमरे में सन्नाटा था।
किसी ने IAS को ऐसे झुकते नहीं देखा था...!!

आर्या ने आदेश दिया—
शिकायत रद्द।
स्कूल को विशेष फंड।
और आदित्य को राज्य पुरस्कार...!!

लेकिन असली फैसला उसने भीतर लिया था...!!

शाम को,
वह उसी स्कूल के गेट पर रुकी...!!

“अगर मैं फिर से…
एक साधारण जिंदगी चुनूँ?”
आर्या ने काँपती आवाज़ में पूछा...!!

आदित्य मुस्कराया,
“मैं अभी भी बच्चों को पढ़ाता हूँ, आर्या।
तुम चाहो, तो यहाँ भी एक क्लास खाली है
नाम है… जिंदगी...!!

उस दिन शहर ने जाना—
पद बड़ा नहीं होता,
संस्कार होते हैं...!!

और कभी-कभी…
सबसे मजबूत व्यक्ति भी
उसके सामने झुक जाता है
जिसने कभी उसे टूटने नहीं दिया...!!

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पूजा मिश्रा ❤️ 

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साभार - https://www.facebook.com/share/p/1a3BtTtw6K/

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