Pages

Friday, 5 December 2025

वेदपाठ - दण्ड-क्रम का संक्षिप्त नियम

वेदपाठ...

दण्ड-क्रम का संक्षिप्त नियम : किसी मन्त्र के पदों को क्रम से रखकर प्रत्येक चरण में पहले दो पदों से आरम्भ होने वाली संक्रम (सीधा) और व्युत्क्रम (उल्टा) जोडियों का निर्माण किया जाता है। और फिर अन्त में प्रत्येक चरण के अन्तिम पद से प्रथम पद तक व्युत्क्रम पाठ किया जाता है । यदि पदक्रम क ख ग घ ङ है तो - प्रथमचरण - कख । खक, द्वितीयचरण - कख । खग । गखक, तृतीयचरण - कख । खग । गघ । घगखक, चतुर्थचरण - कख । खग । गघ । घङ ।ङघगखक, इस प्रकार क्रमशः प्रत्येक चरण में एक पद बढ़ाते हुए यही नियम लागू होता है । प्रत्येक दण्ड में पहले सभी अग्रगामी जोड़ियाँ क ख | ख ग | ग घ… इस रूप में रखी जाती हैं और अंत में उस स्तर तक के पद उलटे क्रम में जोड़े जाते हैं। इससे मन्त्र का क्रमबद्ध, पुनरावृत्तिमय दण्ड-क्रम बनता है। सीधे पाठ को संक्रम और उल्टे पाठ को व्युत्क्रम कहते हैं। इस प्रकार पदों को आगे पीछे करने से जो सन्धि और स्वरों में परिवर्तन होता है, उसे भी ध्यान में रखते हुए पाठ किया जाता है। अन्य नियम अवग्रहआदि पदपाठ के समान ही इसमें भी लागू होते है ।
उदाहरण संख्या में....

1 2 | 2 1
1 2 | 2 3 | 3 2 1
1 2 | 2 3 | 3 4 | 4 3 2 1
1 2 | 2 3 | 3 4 | 4 5 | 5 4 3 2 1
1 2 | 2 3 | 3 4 | 4 5 | 5 6 | 6 5 4 3 2 1
  
शुक्लयजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा का प्रथम मन्त्र, उसका पदपाठ और दण्ड-क्रम-पाठ निम्नलिखित है । इसमें स्वर संधि और अवग्रह आदि नहीं दिखाए गए हैं । यह केवल दण्ड-क्रम की विधि समझने के लिए एक उदाहरणमात्र है । इसे वास्तविक पाठ के लिए नहीं लिया जाना चाहिए । वेद का पाठ गुरुचरण में बैठकर ही सीखा जाता है।

मन्त्रः इषे त्वोर्जे त्वा वायव स्थ देवो व: सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्मणऽआप्यायध्वमघ्न्याऽइन्द्राय भागं प्रजावती-रनमीवाऽअयक्ष्मा मा व स्तेनऽईशत माघशॅं सो ध्रुवाऽअस्मिन् गोपतौ स्यात बह्वीर्यजमानस्य पशून् पाहि॥

पदपाठः (34 पद हैं) इषे त्वा उर्जे त्वा वायवः स्थ देवः वः सविता प्र अर्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्मणे आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या इन्द्राय भागम् प्रजावतीः अनमीवाः अयक्ष्माः मा वः स्तेनः ईशत मा अघशंसः ध्रुवाः अस्मिन् गोपतौ स्यात बह्वीः यजमानस्य पशून् पाहि

दण्ड-क्रम-पाठः (1716 पद बनते हैं) इषे त्वा | त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् गोपतौ | गोपतौ अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् गोपतौ | गोपतौ स्यात | स्यात गोपतौ अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् गोपतौ | गोपतौ स्यात | स्यात बह्वीः | बह्वीः स्यात गोपतौ अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् गोपतौ | गोपतौ स्यात | स्यात बह्वीः | बह्वीः यजमानस्य | यजमानस्य बह्वीः स्यात गोपतौ अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् गोपतौ | गोपतौ स्यात | स्यात बह्वीः | बह्वीः यजमानस्य | यजमानस्य पशून् | पशून् यजमानस्य बह्वीः स्यात गोपतौ अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे | इषे त्वा | त्वा उर्जे | उर्जे त्वा | त्वा वायवः | वायवः स्थ | स्थ देवः | देवः वः | वः सविता | सविता प्र | प्र अर्पयतु | अर्पयतु श्रेष्ठतमाय | श्रेष्ठतमाय कर्मणे | कर्मणे आप्यायद्ध्वम् | आप्यायद्ध्वम् अघ्न्या | अघ्न्या इन्द्राय | इन्द्राय भागम् | भागम् प्रजावतीः | प्रजावतीः अनमीवाः | अनमीवाः अयक्ष्माः | अयक्ष्माः मा | मा वः | वः स्तेनः | स्तेनः ईशत | ईशत मा | मा अघशंसः | अघशंसः ध्रुवाः | ध्रुवाः अस्मिन् | अस्मिन् गोपतौ | गोपतौ स्यात | स्यात बह्वीः | बह्वीः यजमानस्य | यजमानस्य पशून् | पशून् पाहि | पाहि पशून् यजमानस्य बह्वीः स्यात गोपतौ अस्मिन् ध्रुवाः अघशंसः मा ईशत स्तेनः वः मा अयक्ष्माः अनमीवाः प्रजावतीः भागम् इन्द्राय अघ्न्या आप्यायद्ध्वम् कर्मणे श्रेष्ठतमाय अर्पयतु प्र सविता वः देवः स्थ वायवः त्वा उर्जे त्वा इषे ||

~ आचार्य दिलीप जी 🙏

No comments:

Post a Comment