यहाँ त्रिकटु के प्रमुख आयुर्वेदिक लाभों का विवरण दिया गया है:
1. पाचन तंत्र के लिए वरदान (Digestive Health)
त्रिकटु को आयुर्वेद में 'दीपन' (अग्नि बढ़ाने वाला) और 'पाचन' (भोजन पचाने वाला) माना गया है
अग्नि प्रदीप्त करना: यह जठराग्नि (Digestive Fire) को सक्रिय करता है, जिससे भूख न लगने की समस्या दूर होती है
अपच और गैस: यह पेट फूलने (bloating), गैस और भारीपन को कम करने में सहायक है
पोषक तत्वों का अवशोषण: यह शरीर में अन्य औषधियों और भोजन के पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण (Bioavailability) में मदद करता है।
2. श्वसन संबंधी रोगों में लाभकारी (Respiratory Support)
त्रिकटु में कफ को संतुलित करने के गुण होते हैं
कफ नाशक: यह छाती और फेफड़ों में जमे अतिरिक्त कफ को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करता है
सर्दी-खांसी: पुरानी खांसी, जुकाम और साइनस की समस्या में शहद के साथ इसका सेवन रामबाण की तरह काम करता है
3. मेटाबॉलिज्म और वजन घटाने में सहायक (Weight Management)
वसा का दहन: त्रिकटु शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे अतिरिक्त वसा (Fat) को जलाने में मदद मिलती है
कोलेस्ट्रॉल: यह शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स (आमा) को बाहर निकालता है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Boost)
इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं और सूजन को कम करते हैं
त्रिकटु का उपयोग कैसे करें.....?
मात्रा: आमतौर पर 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम (एक चुटकी)
तरीका: इसे गुनगुने पानी या शहद के साथ लेना सबसे प्रभावी माना जाता है।
समय: इसे भोजन से पहले (भूख बढ़ाने के लिए) या भोजन के बाद (पाचन के लिए) लिया जा सकता है
सावधानी (Cautions)
चूंकि त्रिकटु की तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए निम्नलिखित स्थितियों में सावधानी बरतें:
पित्त प्रकृति: जिन लोगों को एसिडिटी, सीने में जलन या अल्सर की समस्या है, उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए
गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए
गर्म मौसम: भीषण गर्मी में इसका प्रयोग सीमित मात्रा में करें।
साभार - ✍️Shivdal Trust Baba Ji
वयं राष्ट्रे जागृयाम
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