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Tuesday, 23 December 2025

"श्रीचक्र" में प्रतिष्ठित " षोडश नित्याएँ " – चेतना की पूर्णता का रहस्य

शक्ति के 16 रूप हर पल आपकी चेतना को नियंत्रित करते हैं?”
“श्रीचक्र में प्रतिष्ठित षोडश नित्याएँ – चेतना की पूर्णता का रहस्य”
यह ब्रह्मांड का नक्शा है।
इसे कहते हैं श्रीचक्र।
मध्य में:त्रिपुरा सुंदरी (षोडशी / ललिता महात्रिपुरसुंदरी)
 यही श्रीचक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं
 सम्पूर्ण सृष्टि, शक्ति और सौंदर्य की मूल स्वरूपा
चारों ओर स्थित 15 नित्याएँ
ये देवी के 15 चंद्र कलाओं का प्रतीक हैं। हर नित्या एक विशेष शक्ति, भाव और साधना का प्रतिनिधित्व करती है।
1. कामेश्वरी नित्या
2. भगमालिनी नित्या
3. नित्यक्लिन्ना नित्या
4. भेरुंडा नित्या
5. वह्निवासिनी नित्या
6. महावज्रेश्वरी नित्या
7. शिवदूती नित्या
8. त्वारिता नित्या
9. कुलसुंदरी नित्या
10. नित्या (कुल नित्या)
11. नीलपताका नित्या
12. विजय नित्या
13. सर्वमंगला नित्या
14. ज्वालामालिनी नित्या
15. चित्रा नित्या
आध्यात्मिक महत्व:
श्रीचक्र = ब्रह्मांड का प्रतीक
त्रिकोण = शिव-शक्ति का मिलन
नित्याएँ = साधक की चेतना के क्रमिक विकास की अवस्थाएँ
यह साधना कामना, ज्ञान, शक्ति और मोक्ष—चारों पुरुषार्थ देती है।
“श्रीचक्र हमें सिखाता है कि बाहर की शक्ति नहीं, भीतर की चेतना ही सबसे बड़ी साधना है।”


#सनातन #jaymatadii
संदर्भ 
https://www.facebook.com/share/17trR8KPpx/ 
सुधीर आर्य 
चलो गुरुकुल की ओर माउंट कैलाशा वैदिक ज्ञान गुरुकुल

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