-दिव्य प्रयोग तान्त्रिक उपाय -
सरस्वती मन्त्र
"ॐ ह्रीं ऐ ह्री ॐ सरस्वत्यै नमः ।"
विधि -
किसी शुभ मुहूर्त से आरम्भ करके १०००० की संख्या में जपने से यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है । फिर १ सेर गाय के घी को ४ सेर बकरी के दूध में डालकर उसमें एक-एक टंक सहजना की जड़, वच, सेंधा नमक, घावड़ा के फूल, तथा लोध मिलाकर मन्दी आग पर पकायें । जब दूध और दवायें जल जाँय तथा घृत शेष रह जाय, तब उसे आग से उतार कर नीचे रक्खें तथा मन्त्र द्वारा अभिमन्त्रित करके नित्य १ तोला घृत उसमें से खाते रहें। इससे विद्या-बुद्धि की अत्यन्त वृद्धि होगी ।
यदि उक्त मन्त्र को नित्य १००० की संख्या में जपता रहे, तब तो विद्या-बुद्धि की वृद्धि के विपय में कहना ही क्या है ।
टिप्पणी-
यदि घृत तैयार न कर सके तो मालकांगनी के तेल को उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित करके स्वल्प मात्रा में सेवन करना चाहिए ।
वयं राष्ट्रे जागृयाम
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