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Friday, 12 December 2025

भज गोविंदं भज गोविंदं गोविंदं भज मूढ़मते ।

इससे पहले कि आपके पैर जवाब दे जायें और घुटनों में गठिया का रोग पकड़ ले , घुटने जवाब दे दें , अपने तीर्थ स्थानों में जितना हो सके भ्रमण करें । 

इससे पहले कि आपका शरीर थकने लग जाये, केदारनाथ से लेकर हर सुदूर पहाड़ों, मंदिरों और तीर्थस्थलों का बिना थके भ्रमण कर लीजिए । 

इससे पहले कि आपकी आँखों से दिखना कम हो जाये , मंदिरों , देवालयों और उनके सुंदर सुंदर विग्रहों के दर्शन कर लीजिए ताकि समय आने पर रूप ध्यान साधना में सहायक हो सके । 

इससे पहले कि आपके कानों से सुनना कम हो जाये , भगवान के गुणों , लीलाओं को , कीर्तियों को ( कीर्तन ) को जी भर कर सुन लीजिए । महापुरुषों और संतों का संग करके उनके अमृत वचनों और ज्ञान की बातों से अपना हृदय मन और बुद्धि को भर लीजिए क्योंकि यही अन्ततः काम आएगा । 

इससे पहले कि आपका कंठ वृद्धावस्था एवं रोग के कारण अवरुद्ध हो जाये , कर्कश हो जाये , कफ से कंठ जाम हो जाये , खांसी से कंठ के तार तार टूट कर बिखर जाएं , हरि का गुणगान , उनकी कीर्तियों का , उनकी लीलाओं का , उनके नाम का , उनके गुणों का मुक्त कंठ से होकर गायन और वाचन करिये । 

इससे पहले कि आपकी जिह्वा वृद्धावस्था और रोगों के कारण मोटी हो जाये , बझने लगे , बोलने में कठिनाई आने लगे , हरिनाम और और उनके गुणों की चर्चा कर लीजिए ।

महापुरुषों , संतों , भक्तों , रसिकों का संग प्राप्त कर उनसे ज्ञान और अपने कल्याण संबंधी चर्चाओं को कर लीजिए , उनसे प्रश्न पूछिये , धर्म और आध्यात्म आधारित प्रश्नों की बौछार कर लीजिए वरना मन में अपने ही शास्त्रों और भगवद सम्बन्धी शंकाओं को लेकर ही मरेंगे और अधम गति की प्राप्ति होगी । 

इससे पहले कि आपकी जिह्वा रस लेना बंद कर दे , पेट की पाचन शक्ति कम हो जाये , व्रत उपवास इत्यादि कर शरीर और मन को बलिष्ठ बना लें और भगवान के विभिन्न भोगों के रस का आनंद प्राप्त कर लें । 

इससे पहले कि आपके हाथ काँपने लग जायें , अशक्त हो जायें , भगवान के विग्रहों के श्रृंगार से लेकर उनकी सेवा कर अपने भविष्य की साधना के लिए संग्रह कर लें । 

इससे पहले कि आपके पैर शिथिल हो जाये , थर थर काँपने लगे , भगवान्नम रस में उन्मत्त होकर नृत्य कर लें , धामों की परिक्रमा कर लें , दीवाना बनकर उनके रस में डूबकर प्रेमाश्रु छलकाते हुए घनघोर नृत्य कर लें । ऐसे अनुभवों को सहेज कर रख लें ताकि जब आप अशक्त होकर चारपाई पकड़ लें तो इन्हीं के सहारे आप आनंदित होकर अपनी साधना के मार्ग को प्रशस्त रख सकें । 

इससे पहले कि आपका धन खत्म हो जाये , विषय वासना , दारू और अन्य विषयी भोगों में लग जाये , सुपात्र को दान देकर अपना धन शुद्ध कर लें। 
वरना आपका धन बैंक की तिजोरियों में भरा रहकर सड़ जाएगा , चोरी हो जाएगा , business में अथाह नुकसान होकर खत्म हो जाएगा , लूट लिया जाएगा आपके ही रिश्तेदारों द्वारा और जब आप खटिया पकड़ लेंगे तब जिनके लिए आप यह धन इकट्ठा कर रहे हैं गधों की तरह पिस पिस कर , यही आपको 2 रोटी टुकड़ा फ़ेंककर आपके ही पैसों से ऐश करेंगे और मरने के बाद आपके शव को बिजली से जलाकर त्रैरात्रि कर मौज करेंगे और आप हीनतर योनियों में अथाह कष्ट पाते हुए भटकते रहेंगे।  

इससे पहले कि आपकी घ्राण शक्ति या सूँघने की क्षमता खत्म हो जाये , जाकर अपने तीर्थस्थानों में मंदिरों में यज्ञ , हवन , अगरबत्ती , भगवान के गले में पड़ी हुई गुलाब , मोगरा , बेला , तुलसी इत्यादि की सुगंध जी भर कर ले लीजिए । 

इससे पहले कि आपके आँखों के देखने की शक्ति मंद पड़ जाए ,शिथिल पड़ जाए , जाईये अपने धार्मिक स्थलों के दर्शन करिये , भगवान के श्री विग्रहों के दर्शन करिये , संतों महापुरुषों के दर्शन करिये , श्री विग्रहों की सुंदरता को अपने नेत्रों द्वारा हृदय और बुद्धि में भर लीजिए क्योंकि जब आप अशक्त होंगे तो यही रूपध्यान साधना में काम आएगा । 

अपने ज्ञान के अगाध समुद्र अपने शास्त्रों को पढ़ लीजिए , संतों महापुरुषों की जीवनियाँ पढ़ लीजिए , उनके भाष्यों को पढ़ लीजिए क्योंकि अंततः यही काम आएगा । 

जाईये और ऐसे सत्पुरुषों को खोजिए और जिज्ञासु भाव ( मात्र जिज्ञासु भाव से ) से अपने आत्मिक उन्नति के विषय में प्रश्न करिये , उपनिषदों , पुराणों , वेदों और अन्यान्य संतों महापुरुषों द्वारा भाषित भाष्यों में निहित ज्ञान को समझिए , हाथ धोकर पीछे पड़ जाईये क्योंकि अंततः यही काम आने वाला है । 

और कोई काम नहीं आएगा । जब आप अशक्त होकर , रोगों से ग्रसित होकर बिस्तर पर पड़ेंगे , मल मूत्र करने के लिए भी नहीं उठ पायेंगे तो यही लोग जिनके लिए आपने गधों की तरह मर मर कर जीवन में पैसा कमाया है और अपने मानव जीवन के महत्व को नकार दिया , यही लोग आपसे दूरी बनायेंगे , आपको झक्की , सठिया गया है कहकर आपको ignore करेंगे । यह बुड्ढा या बुढ़िया जल्दी मर जाये इसकी कामना करेंगे । 
और हो सकता है यह करने के लिए भी आपके वह धनपशु न मिले क्योंकि आपने तो उन्हें विदेश या किसी दूर शहर में जो settle कर दिया है । 

सड़ सड़ कर तड़पेंगे कि यह प्राण निकल जाए पर भोग भोगने के बाद ही शरीर से प्राण निकलेंगे । 
असंख्य बिच्छुओं के एक साथ काटने के समान असह्य कष्ट होगा , आप उस कष्ट की कल्पना तक नहीं कर सकते । 

इसलिए अपने कल्याण के निमित अभी से लग जाईये ताकि आप शरीर स्वयं छोड़ सकें और वह भी मामूली के कष्ट से या ब्रह्मरंध्र द्वारा आनंद से । 

अन्यथा हो सकता है उन अंगों के शिथिल होने से पहले ही पूरा शरीर ही अकस्मात शिथिल न पड़ जाए ।
कुछ हाथ नहीं आएगा । समय बीता जा रहा है । 
कौन कब जाएगा और कैसे जाएगा कोई नहीं जानता लेकिन कैसे जाएगा यह स्वयं के हाथ में है।  
खाली हाथ या आत्मिक आनंद और निधि से परिपूर्ण होकर । 

देर मत करो , आज से ही लग जाओ ,अभी से ही । 
समय नहीं है बिल्कुल भी । 

इसलिए भज गोविंदं भज गोविंदं गोविंदं भज मूढ़मते । 
- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

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