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Thursday, 11 December 2025

वीजली रोकण रो देशी तरीको

आकडै रो अकडोडियो, भीन्वडै रो भोडियो |
भीन्वडै री कूट्योडी, अंकाश चढी ||
जद बरसात रै मौसम मे वीजली चमकती, घोर वीजली कडाका करती तो आक री डाली लाय नै झूम्पडै रै माथै नान्ख देवता अर जोर जोर सूं ऐ लैणा बोलता | मानेता ही कै इण सूं वीजली नी पडेला |
इण टोटकै मे कितो सान्च है इण रो तो पतो नी पण करता सगला ई हा | कान्सी रा बरतन लाय अर झूम्पडै मोय राखता अर ओडै माथै आकडे री डाली | वीजली रोकण रो देशी तरीको हो | हमै तो ऐ सब भूल गया, कान्सी रा बरतन गायब, हमे वीजली मोबाइल माथै पड़ण रो डर जरुर लखावै | मरणो कबूल है पण मोबाइल नी छोडै |।
साभार - Pancha Ram Choudhary 

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