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Thursday, 21 May 2026

भाव और शुभ-संकल्प सूं .. मिनख सो क्यूं कर सकै हैं .


भाव और शुभ-संकल्प सूं .. मिनख सो क्यूं कर सकै हैं .

ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च॥

घणा बरसां पैलां री बात है, मेङता सिटी रे कने एक छोटो सो गांव हो—*खाखङकी*। उण गांव में एक सीधा-साधा सा मिणख रहता, जिणरो नाम हो **धीरज**। धीरज पांगळो (पैरों से कमजोर) हो, उणसूं भाग-दौड़ कोनी होती। पण उणरे मन में जीव-दया और सेवा रो भाव कूट-कूटकर भर्योड़ो हो।
धीरज रो एक ही नियम हो—गांव री लावारिस, बीमार और बूढ़ी गायां री सेवा करणी।
### **अकाल रो वो काळ**
एक बार मारवाड़ में भयंकर अकाल पड़ गयो। ना तिनको घास रो बच्यो, ना बूंद पाणी री। गांव रा कुआं सूख गया और डांगर-ढोर (पशु) भूख-तीस सूं मरण लाग्या। गांव रा घणा लोग आप-आपा री गायां ने छोड़कर मालवे (दूसरे प्रदेश) कानी निकल गया।
पण धीरज गांव कोनी छोड़्यो। वो बोल्यो—*"जद आं गायां म्हाने दूध पायो, म्हारो पेट भर्यो, तो आज संकट रे टाळ में म्हे आंने एकली छोड़कर कस्यां जाऊं?"*
### **धीरज री जीव-दया**
धीरज सूं चाल्यो कोनी जातो, पण वो हाथ सूं घिसट-घिसटकर दूर धोरां में जाता।
 * कटी सूं सूखी झाड़ियां और 'खेजड़ी' रा लूंग (पत्ते) इकट्ठा करता।
 * अपनी लाठी रे भरोसे कुएं सूं थोड़ा-बहुत पाणी खींचता और गायां वास्ते 'खेळ' (पाणी का हौद) भरता।
एक दिन दोपहर में एक बूढ़ी गाय भूख रे मारे निढाल होकर धीरज रे आंगणे में गिर गी। उणरी आंख्यां सूं आंसू बही रहा हा। धीरज कने उण दिन खुद रे खाण वास्ते सिर्फ एक सूखी बाजरे री रोट ही। उणने जरा भी सोच-विचार कोनी कर्यो। उणने रोट रा छोटा-छोटा टुकड़ा कूर्या, पाणी में भिगोया और अपने हाथ सूं उण गाय ने जिमाया।
धीरे-धीरे गाय उभी (खड़ी) हुई और धीरज रे हाथ ने चाटण लागी, जाणे वो आशीर्वाद दे रही हो।
### **धरम रो मर्म**
थोड़ा दिनां पाछै अकाल मिट्यो, सुकाळ आयो। गांव रा लोग पाछा मुड़कर आया। जद उणांने देख्यो कि अकाल में भी धीरज री मेहनत सूं गांव री घणी गायां बच गी, तो सब लाजाळू (शर्मिंदा) होया और धीरज रा पगां में गिर गया।
गांव रो ठाकुर बोल्यो—*"धीरज, म्हे तो साजा-धजा होता थकां भी भाग गया, पण थूं अपंग होता थकां भी मरुधर री लाज रख ली। साचो मारवाड़ी और साचो सेवक तो थूं ही है।"*
### **कहानी री सीख (Moral)**
मारवाड़ में कैवे कि—**"गायां री सेवा, सबसूं मोटी देवा"**।
आ कहानी म्हाने सिखावे कि सेवा करवा वास्ते धन या मोटो शरीर कोनी चाहीजे, सिर्फ एक मोटो और साफ 'हिवड़ो' (दिल) चाहीजे। जीव-दया ही सबसूं मोटो धरम है।
**हुकम, आ कहानी कस्यां लागी?**
                  ✍️ सुशी मारवाड़ी 
                     वयं राष्ट्रे जागृयाम 

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