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Monday, 23 March 2026

तर्कशील व्यक्ति को ज्ञान अवश्य होना चाहिए ।

सबसे पहले समझिये कि तर्क और विज्ञान का अपना एक विशेष दायित्व होता है । कौन सा तर्क और कौन सा विज्ञान कहाँ लगाना है , इसका तर्कशील व्यक्ति को ज्ञान अवश्य होना चाहिए । 

प्रत्येक तर्क या विज्ञान का अपना एक सीमित क्षेत्र होता है , उस दायरे से अलग हटकर कोई भी तर्क कार्य नहीं करता । 

जैसे :- 

एक ही लाठी से सबको नहीं हाँका जा सकता है ।
सबके लिए अलग अलग दंड या नियमावली की आवश्यकता होती है । 

अब फिर समझिये :- 

जैसे अगर कपड़े पर कुछ काला लग जाये तो उसे पानी से साबुन से साफ किया जा सकता है ।

लेकिन अंधेरा भी काला काला दिखता है ।
उसे ज्योति से साफ किया जा सकता है ।
उसको कोई कहै कि यह भी तो काला है , जब काला पानी से साफ हो सकता है तो यह वाला काला क्यों नहीं ?? 

*रवि बिनु रात न जाय ।* 

तो दोनों कालापन के लिए अलग अलग तत्वों का प्रयोग किया जाएगा । 

फिर समझिये - 
ऐसे ही लैपटॉप गन्दा हो गया हो तो उसे पानी में डुबाकर या वाशिंग मशीन में डालकर नहीं साफ किया जा सकता । 
और कपड़ा गन्दा हो गया हो तो ?? 

हाँ उसे वाशिंग मशीन में , सर्फ डालकर साबुन लगाकर पानी से साफ किया जा सकता है । 

तो दोनों जगह विधियों का अंतर । 

अब देखिए एक ही वस्तु एक ही तत्व से बनी हुई , लेकिन अलग अलग वस्तु तत्व से निराकरण होती है ।

अब फिर समझिये :- 

आप पहले Sperm थे बस । 
और कहाँ थे ? बताने की आवश्यकता नहीं है , आप भी जानते हैं ।
अब कैसे इतने बड़े बन गए ??? 

अब आपका कोई पुत्र हो 5 वर्ष का उसको स्पर्म दिखाकर कहिये कि बेटा देखो तुम यह थे पहले । 

क्या वह मानेगा ???

वह नहीं मानेगा । क्योंकि उसकी बुद्धि उस बात को समझ ही नहीं सकती चाहे कितना भी बड़ा Scientist आकर उसे क्यों न समझाए । 

ऐसे ही किसी बीज को देखकर आप यह अनुमान ही नहीं लगा सकते कि उसमें से इतना विशालकाय वृक्ष निकलेगा जो आपके क्षेत्र को ढक लेगा ।

किसी ऐसे व्यक्ति को या बच्चे को दिखाइए , जो न जानता हो , तो आप किसी भी तरह उसे नहीं समझा सकते कि इतनी छोटे बीज से कैसे इतना बड़ा वृक्ष निकल जायेगा जिसका भार 50 हाथियों के बराबर होगा । 

ठीक इसी तरह व्याकरण के सिद्धांत और formulae किसी अन्य जगह नहीं चल सकते ।
physics के formulae chemistry के सिद्धांत को नहीं समझ सकते ।

chemistry के formulae physics या biology के सिद्धांत को नहीं समझ सकते ।
सबका अपना अलग अलग सीमित दायरा और क्षेत्र है और वह उससे बाहर नहीं जा सकते । 

जो प्रेम आप अपनी पत्नी से करते हैं , उस तरह का प्रेम आप अपनी बहन , माँ , बेटी , चाची से नहीं कर सकते , देखिये , हैं वह भी स्त्री , कोई अंतर नहीं उनमें ।।

लेकिन जिस तरह आप अपनी प्रेमिका पत्नी स्त्री के साथ शयन कक्ष में होते हैं , वही फार्मूला सभी स्त्रियों पर लागू नहीं हो सकता । 

आपको बताया गया कि आपको *फैक्स* करने का अधिकार केवल पत्नी से है ।
पत्नी से ही आप legal तरीके से फैक्स कर सकते हैं ।
अब आप किसी मित्र के विवाह में गए और सभी मित्र आपसे मिले । आपने पूछा कि यह बगल में आपके स्त्री कौन है ? उसने कहा कि पत्नी है ।

तो अगर आप सभी पत्नियों के साथ फैक्स करने लगे बस नाम देखकर कि पत्नी के साथ ही Fax legalised है तो आपकी क्या हालत आपके मित्र करेंगे , आपको भी पता है । हालांकि फैक्स से आप उसे इन्द्रियों का आनंद ही देंगे , लेकिन कितना अंतर हो जाएगा , यह आप समझ सकते हैं ।

अब फिर समझिये :- 
अब एक मिट्टी है जिस पर आप चलते हैं । आप किसी के घर गए और वहाँ किसी की death हुई है । मृत शरीर को लोग मिट्टी कहते हैं कि उनकी मिट्टी में जाना है आदि आदि ।

आपने उसे मिट्टी समझ कर लात मारी या उस पर चले , भले उस मृत शरीर को कोई पीड़ा नहीं , लेकिन आपको उसके बाद उसके परिवार वालों से कितने लात पड़ेंगे और पीड़ा का सामना करना पड़ेगा , यह आप भी नहीं अनुमान लगा सकते । 

इसीलिए वेदों में पहले ही बोल दिया गया कि उस ईश्वर को कोई नहीं समझ सकता चाहे कितना भी प्रयत्न कर ले । 

क्यों कहा ऐसा ????? 

क्योंकि :- 

इंद्रियेभ्यः परा ह्ऱर्था अर्थेभ्यश्च परं मनः ।
मनसस्तु परा बुद्धिर्बुद्धेरात्मा महान परः ।।
महत: परमव्यक्तमव्यक्तात पुरुषः परः ।
पुरुषान परं किंचित सा काष्ठा सा परा गति: ।। 

इसका अर्थ क्या है ?? 

यही है कि इन्द्रियों से परे इन्द्रियों के विषय हैं , विषयों से परे मन है , मन से परे बुद्धि है , बुद्धि से परे जीव है , जीव से परे माया है , माया से परे ब्रह्म है । 
मतलब ?? 
मतलब यह कि इन्द्रिय , मन, बुद्धि आदि से ईश्वरीय क्षेत्र सर्वथा परे है । 

और दूसरा कारण सुनिए क्या है ! 
*दिव्योह्वमूर्ते: पुरुषः ।* 

क्योंकि ईश्वर दिव्य है और मनुष्य के मन बुद्धि इन्द्रिय आदि मायिक हैं । 

मायिक का मतलब समझते हैं आप ?? 
Quantum physics तो पढा होगा न ?? 

Illusion है । भ्रांति है । भ्रम रूप है ।

अब भला भ्रम त्तत्व से उस दिव्य परा तत्त्व की सत्ता का आभास या अनुभव कैसे किया जा सकता है ?? 

तीसरा कारण सुनिए :- 

तमेव भांतमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति । 

अर्थात वह इन्द्रिय मन बुद्धि का प्रकाशक है । 
तो भला इन्द्रिय मन बुद्धि आदि अपने प्रकाशक की प्रकाशिका कैसे हो सकती है ?? 

अब चौथा कारण सुनिए । 

यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मणो मतं ।
तदेवं ब्रह्मं त्वं विद्धिं नेदं यदिदं उपासते ।। 

अर्थात उसकी प्रेरणा से इन्द्रिय , मन , बुद्धि अपना अपना कार्य करने में समर्थ होते हैं तो भला प्रेर्य इन्द्रिय मन बुद्धि अपने ही प्रेरक ईश्वर को ग्राह्य करने में भला कैसे समर्थ हो सकते हैं ??? 

फिर वेद कहते हैं कि :- 

अणोर्नियान महतो महियानात्मा गुहायाम निहितोअस्य जन्तो: ! 
.......

अर्थात आप जितना भी छोटा और सूक्ष्म सोच सकते हैं , वह भगवान या ईश्वर या ब्रह्म उससे भी छोटा है और जितना बड़ा या विराट आप सोच सकते हैं , भगवान , ईश्वर या ब्रह्म उससे भी बड़ा और विराट है ।

फिर वेद कहता है कि :- नेति नेत्यस्थूलमनणु: ! 

अर्थात न वह छोटा है और न ही बड़ा है ।

ये लो !!! 

अब ?? 

अब आपके Quantum physics की बात कर लेते हैं ।

अभी ऊपर वाले को भूलियेगा नहीं । उस पर दुबारा लौटकर आना है ।

तो जो आज आपका classical physics है या Conventional फिजिक्स है या स्थूल सिद्धांत हैं फिजिक्स के , वह सूक्ष्म स्तर पर जाते ही fail हो जाता है , nullify हो जाता है ।

नहीं समझ आया होगा ।

दुबारा समझिये । 

स्थूल physics के सिद्धांत Quantum physics के स्तर पर यजे सूक्ष्म physics के स्तर पर कार्य नहीं करते ।।

फिर से English में भी समझ लीजिये क्योंकि आजकल के Cool dudes को लगता है कि ज्ञान केवल English भाषा में ही है :- 

*Classical Physics is totally wrong in the world of Quantum Physics or Modern Physics.* 

अब फिर से और इसे simplify कर देता हूँ ।।

जो Solid Liquid Gas का concept आप भौतिक जगत में पढ़ते हैं और इतने सारे सिद्धांत Solid, Liquid , Gas के , वह Quantum level पर आकर fail हो जाते हैं । 

क्योंकि Quantum level पर न Solid है , न Liquid है और न ही Gas है ।

वहाँ तो सब कुछ vibration के form में है स्पंदन के रूप में । 
Everything is in the form of Vibration. 

जो हमारा वैदिक दर्शन ही बता देता है ।

ये Quantum quarks इत्यादि तो आज ढूंढें गए हैं न , हमारा वैदिक शास्त्र तो आज से नहीं सनातन समय से यही बता रहा है । 
बताऊं कैसे ?? 

अब Quantum Physics क्या कहता है ??? 

Quantum physics कहता है कि जो कुछ भी इस सृष्टि में दिखाई पड़ रहा है , उसका कोई अस्तित्व है ही नहीं । 

Everything is an Illusion. 

सब कुछ भ्रम है ।

तो हमारा वैदिक विज्ञान क्या कहता है ?? 

यही कहता है कि *"सब मोह माया है ।"* 

यह कोई साधारण वाक्य नहीं है ।
इसे आपको Quantum Physics से समझाता हूँ । 
क्योंकि आपको हर जगह Quantum Physics घुसाना है तो मैं उसको उसी के आधार पर बताऊँगा ।

Quantum physics क्या कहता है ?? 

इस संसार में किसी भी वस्तु या पदार्थ Exist ही नहीं करता है । सब भ्रम है । 

यह exist होता हुआ क्यों दिखाई पड़ता है ?? 
क्योंकि हमने उसे मान लिया है ।
अन्यथा सब कुछ Vibration है । 
जो कुछ भी हम देखते सुनते अनुभव करते स्पर्श करते हैं , सब कुछ तरंग के रूप में है ।।
वह Matter के रूप में या Solid Liquid या Gas के form में नहीं है । 

Everything is Vibration in this World. 

लेकिन फिर वही Quantum physics बोलता है कि इस waves या vibrations या तरंग के दो रूप हैं ।।

क्या हैं वह ?? 

पहला तो Wave और दूसरा Particle । 

इसे ही *Wave Duality* कहते हैं । यही theory wave duality के नाम से जग प्रसिद्ध है । 

लेकिन यह Wave dual मतलब दोगला व्यवहार या दो रूप कब दिखाता है ??? 

वस्तुतः सभी कुछ मैं , आप , मेरी श्वांस , मेरे जूते , मेरा मोबाइल , मेरी लिखावट , मेरे लेख , मेरा सोचना , मेरा घर , मेरा परिवार , मेरा सब कुछ या जो कुछ भी इस संसार में है सब कुछ Waves हैं । 

वह particle या पदार्थ के form में कब आते हैं ? 

जब कोई व्यक्ति या दृष्टा उस दृश्य को देखता है ।
मतलब जब कोई Observer उस wave को Observe करता है तभी वह Particle के रूप में behave करता है ।

अन्यथा वह एकमात्र Wave ही है । 

मतलब किसी चीज़ का अस्तित्व है ही नहीं , सिवाय waves के । 

आप Quantum Physics के Double Slit Experiment को तो जानते होंगे । उसमें क्या था ?? 

एक observer के कारण ही वह wave पार्टिकल के form में आ जाता है ।।

लेकिन तब तक नहीं आता जब तक कोई दृष्टा उसका न हो ।

अर्थात दृष्टा और दृश्य दोनों जब तक नहीं होते तब तक वह wave Particle में नहीं आता ।

मतलब एक ही समय वह photon Visible और Non Visible दोनों तरीके से कार्य करता है ।

वह दिखता भी है और नहीं भी दिखता है ।

किसे दिखता है ?? दृष्टा को । 
और कब तक वह Mr. India बना रहेगा या नहीं दिखेगा ? जब तक दृष्टा उपलब्ध न हो । 
मतलब हम जो कुछ भी देखते हैं solid चीज़ , वह एकमात्र electrons का गुच्छा है ।

तो Quantum Physics क्या कहता है ?? 

Nothing Exists in the world . Quantum theory कहती है ।
हम जैसे देखते हैं , वैसे ही यह संसार स्वयं को Mould कर लेती है । या उसी प्रकार हमें दिखने लगती है ।

अब इसे आध्यात्मिक law से समझिये । 

सृष्टि को माया कहा गया है । Illusion ।

यही तो Quantum physics कह रहा है । 

द्वे वाव ब्रह्मणो रूपे मूर्तं चैवामूर्तं च मर्त्यं चामृतं च स्थितं च यच्च सच्च त्यं च॥ 
- छान्दोग्योपनिषद 

यही मन्त्र वृहदारण्यक उपनिषद और मैत्रायणी उपनिषद में भी आया है । 

यह वेदों का ही मन्त्र है ।
इसका अर्थ वही है जो Quantum Physics कह रहा है ! 

ब्रहा के दो रूप हैं- मूर्त और अमूर्त । जो मूर्तरूप है, वह असत्य है और जो अमूर्त रूप है, वह सत्य है, वही (यथार्थ) ब्रह्म है। जो ब्रह्म है, वही ज्योति है और जो ज्योति है, वहीं आदित्य है। यही ॐकार (प्रणव) है, वही आत्मा है। उसने अपने स्वरूप को तीन प्रकार से प्रकट किया है। कार तीन मात्राओं से युक्त है। इसी ॐकार में सभी तत्त्व विद्यमान हैं, इस तरह श्रुति में वर्णन मिलता है। आदित्य ही ॐकार स्वरुप ब्रहा है । 

यही बात रामचरितमानस कह रही है कि :- 

अगुनहिं सगुनहिं नहिं कछु भेदा ।।
गावहिं मुनि पुराण बुध वेदा ।। 

वही भगवान निराकार है और वही भगवान साकार है ।।

फिर से वेदों ने इसी Quantum Mechanics को समझाया है । 

क्या ?? 

अजायमानो बहुधा विजायते , तस्य योनिं परिपश्यन्ती धीराः । 

अर्थात वह अजन्मा भी है एवं अनन्तानन्त जन्म भी धारण करता है ।

इस वेद मन्त्र में समस्त quantum physics के सभी पाँचों मुख्य सिद्धांत समाहित हो गए । 

अर्थात वह अवतार भी लेता है । 

लेकिन कब लेता है जब दृष्टा अर्थात हमें आवश्यकता होती है ।

एक ही तत्त्व Wave form में भी है और वही तत्त्व Particle form में भी है । 

लेकिन तभी जब दृष्टा चाहे । 

अब फिर से Quantum physics पर आईये । 

वह कहता है कि wave तभी particle form में convert होता है या वह matter या particle की तरह behave करता है जब दृष्टा के electrons या photons उस पर क्षेपण करते हैं , मतलब उसे disturb करते हैं । 

दृष्टा के आते ही वह wave , particle में convert हो जाता है ।

मतलब निर्गुण निर्विशेष निराकार ब्रह्म , सगुण सविशेष साकार ब्रह्म में परिवर्तित हो जाता है ।।

लेकिन किसके लिए ?? 
दृष्टा के लिए ! 

दृष्टा कौन ? जीवों के लिए ।।

यही पूरा का पूरा Quantum physics उड़ेल दिया है एक सिद्धांत में । 

यथा दृष्टि , तथा सृष्टि । 

जैसी दृष्टि , वैसी ही सृष्टि ।

Law of Attraction and Quantum Mechanics are deeply related to each other. 

जैसा आप सोचेंगे और भाव बनाएंगे , विश्व का प्रत्येक पदार्थ उसी तरह behave करने लगेगा । 

यही Quantum Physics और Law of Attraction को तुलसीदास जी ने एक चौपाई में समेट दिया । 

जेहिं कर जेहिं पर सत्य सनेहू । 
सो तोहिं मिलहिं न कछु सन्देहू ।। 

यही Quantum Mechanics समझाई गयी है भागवत में , रामायण में । 

जिस जिस भाव के लोग थे , उस उस भाव में लोगों ने भगवान को जनकपुरी में धनुष भंग के समय देखा ।

यही Quantum physics - 

जिस जिस भाव के लोगों ने भगवान कृष्ण को कंस के यज्ञशाला में देखा , उसी उसी भाव में भगवान सबको दिखाई पड़े । 

यही Quantum Physics समझाई गयी है देवी पुराण या तन्त्र शास्त्र में या दुर्गा सप्तशती में :-

यं यं चिंत्यते कामं , तं तं प्राप्नोति निश्चितं । 

यही Quantum Physics समझाई गयी है हमारे शास्त्रों में ।

Quantum Physics क्या कहता है ?? 

वह कहता है कि यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड vibration से या waves से बनी है ।
waves या vibration का deherence होने से या विकृत्ति होने से यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड बना है ।

इसका कहना है कि जब आप atomic level से इस ब्रह्मांड को देखेंगे तो यह Liquid रूप में है । 
यह जल का एक समुद्र है ।
इस समुद्र में विभिन्न प्रकार की तरंगों से ही यह सृष्टि बनी है ।

यही तो हमारा वैदिक सिद्धांत कह रहा है ।

एकार्णव जल , कार्रणव जल जिसे आजकल की भाषा में कहा जाता है कि क्षीर सागर , या जिसका समुद्र मंथन हुआ था । 
जहाँ से पृथ्वी को निकाला गया था हिरण्याक्ष को मारकर । 
अब हिरण्याक्ष कौन था , यह मेरे किसी लेख में पढ़ लीजियेगा । 

अब आते हैं कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड vibration से बना है ।

बिल्कुल बना है । 

आईये हमारे वैदिक विज्ञान में । 

शुरू करते हैं कि यह सृष्टि कैसे बनी । 

जिसे आप सबसे छोटी unit quark या photon कहते हैं , क्योंकि अभी विज्ञान बिचारा यहीं तक पहुँचा है , हमारे वैदिक विज्ञान में उसे सूत्रात्मा वायु बोलते हैं ।

ये यह वाला वायु नहीं है , यह वायु कुछ अलग है । 

इसे आप लोगों की भाषा में बोला जाय तो इसे space unit बोलते हैं ।
यह बहुत ही सूक्ष्म स्पंदन या vibration होता है ।
यही सूत्रात्मा वायु स्पंदित या Vibrate करता है तो उसे अलग अलग प्रकार से बोला जाता है । 
जैसे ऋक छंद स्पंदन या Vibration भू या पृथ्वी को बनाता है ।
यजु: छंद स्पंदन भुवः को बनाता है ।
स्व: को बनाता है साम छंद स्पंदन । 

अब यह क्या करती हैं ?  

11 प्रकार की वायु या vibrational force होता है ।

जैसे :- 

1. सूत्रात्मा वायु - Space Unit या सूक्ष्म स्पंदन को जोड़ता है ।।

2. धनन्जय - इसके कारण कोई भी particle या photon अपनी axis पर घूमता है ।।

3. प्राण :- यह आकर्षण बल है । भीतर से बाहर । 
ऐसे ही अन्य हैं । यहाँ ज्यादा विस्तार नहीं करूंगा ।।

4. अपान 
5. व्यान 
6. समान 
7. उदान 
8. नाग 
9. कूर्म 
10. कृकल 
11. देवदत्त 

तो अब जैसे प्राण + 7 स्पंदन से 1 ऋतु बनता है ।

ऋतु स्पंदन + 13 बार स्पंदित करते हुए यह मास बनता है ।

ऐसे ही प्राण + अपान जब 30 बार vibrate होगा या स्पंदित होगा तो वह Mass Vibration बनाता है 12 प्रकार का ।

अब जैसे मास रूपी स्पंदन देखिये । 

1. वसंत - मधु + माधव का स्पंदन होता है तब बनता है । 

2. ग्रीष्म - शुक्र + शुचि स्पंदन 

3. वर्षा - नभस + नभस्य स्पंदन 

4. शरद - ईश + ऊर्ज स्पंदन 

5. हेमंत - सहस + सहस्य स्पंदन 

6. शिशिर - तपस + तपस्य स्पंदन 

तो सब कुछ स्पंदन से हुआ है ।

यह सभी स्पंदन के प्रकार भी अलग अलग हैं । मतलब इनका synchronization भी अलग अलग है ।
इन्हें ही हम विभिन्न छंदों के नाम से जानते हैं ।

जिसे 
1. गायत्री 
2. उश्निक 
3. अनुष्टुप 
4. वृहती 
5. पंक्ति 
6. त्रिष्टुप 
7. जगती 

छंद के नाम से जानते हैं ।

यह सभी छंद भी अलग अलग प्रकार से स्पंदित या vibrate होते हैं ।

जैसे 
1 दैवी 
2 याजुषि 
3 प्रजापत्य 
4 सामनी 
5 आसुरी 
6 आर्ची 
7 आर्षी 
8 ब्राह्मी 

अब आईये सृष्टि की प्रारंभिक उत्पत्ति पर ।।
ऊपर अभी Quantum mechanics में बताया गया कि photon में विक्षोभ करने पर photon ने अपना Wave गुण बदलकर particle या matter form में परिवर्तित हो गया ।

यही देखिये । 

waves के form में ब्रह्म था ।
उसमें विक्षोभ या प्रेरणा होने पर शक्तियों का प्राकट्य हुआ जिससे परमात्मा फिर भगवान बना ।

अब आगे का फिर बाद में .....

If you copy this ,mention name too as you can't explain ahead if any reader ask more cross questions.
Thanks 

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज 
आध्यात्मिक दिग्दर्शक 
Shwet Prem Ras 
अगर आप अपने संस्थान में मोटिवेशनल one to one challanging questionnaire सत्र करवाना चाहते हैं तो हमे संपर्क कर सकते हैं।
9711200422 श्वेताभ पाठक 

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