Pages
ARTICLES
Friday, 27 March 2026
माया आवे जावे
माया आवे जावे सखी, कोनी पक्को वास।
हेत बिना सब थोथो हैं , मत कर धन री आस ॥ ✍️ _महेंद्र खोजा_
अर्थात्:-लक्ष्मी तो आती-जाती रहती है, इसका कोई स्थायी ठिकाना नहीं। प्रेम के बिना सब खाली है, इसलिए केवल धन की आशा मत कर।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment