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Friday, 20 March 2026

सबसे धनी वही है जो स्वस्थ हैं ,,,, (१)

सबसे धनी वही है जो स्वस्थ हैं ,,,,
चिकित्सा ज्योतिष बहुत अनूठा विज्ञान है ,इसमें ग्रहों की स्तिथि उनके आपसी सम्बन्ध से शरीर में जो ऊर्जा , वात पित्त और कफ जो प्रभावित होते है उसके कारण ही रोगों की उत्पति होती है । आम तौर पर आपको रोग हुआ आपको डॉक्टर बताएंगे आप ब्लड टेस्ट कराओ, आप xray कराओ , MRI कराओ फिर वह निष्कर्ष में पहुंचेगा कि रोग कौनसा है और क्यों आया । 

डॉक्टर जहां रोग का कारण आनुवंशिक ,स्वयं की लापरवाही , आदि कारण बताता है, वहीं ज्योतिष में हम इसको मानते है पूर्व जन्म के कारण हेतु। आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथों में आपको श्लोक मिल जाएंगे कि पूर्व जन्म के कर्मों के कारण ही रोग आते हैं।इसका एक दिलचस्प उदाहरण देता हूं , एक जातक ने हमसे प्रश्न किया कि हमारे परिवार में हर बच्चा बहुत देर से बोलता है , या तुतला के बोलता है,जुबान लगती है ,क्या आप बता सकते हैं ऐसा किस कर्म के कारण होगा । 

मैने पूर्व जन्म पत्रिका बनवाई ,उसमें पक्षी कष्ट आया। अर्थात याद रखें आपको जो भी स्वास्थ दिक्कत होगी वह पूर्व जन्म में किसी को देह कष्ट,हत्या ,जीव जंतु कष्ट, पेड़ो को काटने आदि के कारण आती है । उस पत्रिका में शनि सभी बच्चों की जुबान देर से खोल रहा था ,और वही पूर्व जन्म का कारक ग्रह बन रहा था । जातक ने बताया हमारे पूर्वज ने कौवे को मारा था उसकी जीभ काट दी थी ,इसके कारण सभी के बच्चे ऐसे निकल रहे थे। यही अंतर है आधुनिक चिकित्सा और medical astrology में। भगवत गीता में अर्जुन को वासुदेव बताते हैं अर्जुन तूं नहीं जानता तूने क्या क्या किया है, मैरे पास सबके जन्मों का हिसाब किताब है। आप जानते है सबसे अधिक उपायों में स्वास्थ पर शास्त्रों में उपाय दिए हैं। जैसा मैं कहता हूं हर समस्या का विशेष उपाय होता है जो सिर्फ उसके लिए बना है। 

स्वास्थ, कुंडली में लग्न ,सूर्य ,चन्द्रमा ,मंगल पर निर्भर करता है।चन्द्रमा मजबूत होगा तो ऋतु परिवर्तन में बीमार नहीं रहेगा ,लग्नेश बलवान हो तो कभी गंभीर रोग नहीं आएंगे , सूर्य अच्छा हो तो बुखार भी 1,2 साल में एक बार आता है। मंगल देह कारक होने से जातक को युवा ,कसरत वाला बनाकर रूष्ट पुष्ट करता है। षष्ठ भाव हल्की बीमारी है ,अष्टम स्थान icu है, द्वादश भाव भर्ती हो जाने का है। द्वादश भाव में शुभ ग्रह अच्छे nurse की care देता है । 

जितने भी गंभीर रोग है ट्यूमर,कैंसर ये राहु ,केतु ,और अष्टम भाव से उपजते हैं। जब भी आपको रोग होगा तो शरीर को कवच चाहिए होते है। कोई आपको तीर मारेगा तो आप ढाल का कवच बनाएंगे उसी तरह शास्त्र में जितने कवच दिए हैं ये लग्न,षष्ठ अष्टम स्थान से सुरक्षा हेतु ही दिए हैं। जैसे मेष ,वृश्चिक लग्न का जातक है ये मंगल का लग्न है ये बीमार होगा तो राम रक्षा कवच दिया है ना शास्त्रों में । जैसे वृषभ , तुला लग्न है ये देवी का लग्न है तो दुर्गा कवच दिया है ना दुर्गा सप्तशती में । जैसे सिंह लग्न है तो सूर्य के लिए याज्ञवल्क्य जी ने कवच बनाया है ना। मेरे कहने का अर्थ है मनुष्य को रोग आयेगा ये वह विद्वान भलीभांति जानते थे इसलिए विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में कवच दिए हैं । 

आप यहां स्तोत्र नहीं कर सकते ,स्तोत्र एक स्तुति है एक भव्यता है एक दिव्यता है एक प्रसन्नता है ,बीमारी में ये भाव अंदर से नहीं होता वहां ताकत चाहिए,साहस चाहिए , ईश्वर का साथ चाहिए इसलिए हर कवच में पढेंगे की भगवान मेरे इस अंग की रक्षा करें , मेरे मार्ग में रक्षा करें , आदि। परन्तु ये दुगना कार्य करता है जब खानपान अच्छा हो,सही उपाय मिले और अच्छा डॉक्टर का इलाज चल रहा हो तो ये त्रिभुज शक्ति बनकर उस समस्या को चोट करता है। सिर्फ कवच पढ़ें और दवाई न खाएं यह कार्य नहीं करेगा ।अब चिकित्सा ज्योतिष ,विभिन्न रोग , स्वास्थ संकट कब आयेगा ,कौनसे रोग होंगे , कब व्यक्ति थीं हो सकता है ,क्या डॉक्टर बंदलना होगा , क्या पद्धति बदलनी होगी , शास्त्र में रोगों पर क्या क्या उपाय दिए हैं ,धीरे धीरे करके लेख लाते रहेंगे।
 _ आरोग्यता हेतु प्रत्येक लग्न के लिए कवच
मेष ,वृश्चिक लग्न _ राम रक्षा कवच
वृषभ तुला लग्न _ दुर्गा कवच
मिथुन कन्या लग्न _ नारायण कवच
कर्क लग्न _ शिव कवच
सिंह लग्न _ सूर्य कवच
धनु मीन लग्न _ विष्णु सहस्रनाम       
मकर कुंभ लग्न _ महामृत्युंजय मंत्र..


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