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कुटुंब कलेश , आर्थिक तंगी , अविवाहित या दुखी दाम्पत्य जीवन , निःसंतान या बेरोजगार , भूत प्रेत की सवारी आना या किसीने ईर्ष्या भाव या वैरभाव से करवाई तांत्रिक क्रिया .. इन सब कारणों से अनेक परिवार पायमाल हो रहे है । अपनी समस्याओ से मुक्ति केलिए अनेक प्रकार के विधान पूजा करवाते है । पर कोई उपाय नही सूझते , कोई परिणाम नही पाते ओर सब व्यर्थ हो जाता है ।
किसीने पूछा था कि हमारे पितृ जो हमारे पूर्वज है वो क्यों नुकसान करेंगे ? पहले ये प्रेत ओर पितृ का फर्क समझना होगा। पहले के लोग आसुरी वृतियो से दूर रहकर घर , परिवार , कुटुंब , गांव का भला हो ऐसे सद्भाव विचार वाले थे । उनके जीव की किसी कारणवश गति नही हुई तो वो पितृलोक को प्राप्त होते थे । पितृ बनने के बाद भी वो हमेशा घर परिवार गांव का भला ही करते थे। केयुकी जो वृति जीवंत शरीर के साथ थी बादमे भी वही रहती है। और जो काम क्रोध , कपट , प्रपंच , ईर्ष्या , अहंकार जैसी आसुरी वृति के साथ मृत्यु को प्राप्त करते है हो वो प्रेतयोनि को प्राप्त होते है। अब सोचिए कि आजकल ज्यादातर लोग किस वृति के है ? वो मृत्यु के बाद किस योनि को प्राप्त करेंगे ? वो आप केलिए पितृ है पर मूल रूप तो प्रेत ही है ।
" जो दया करे वो देव और दमन करे वो प्रेत "
10 साल से बड़ी हरेक कन्या ओर स्त्रियां मस्तिष्क को ढंक के रखते थे । मासिकधर्म के समय और अमावस्या या ग्रहण जैसे कालमे ओर सूर्यास्त के बाद घर से बाहर नही जाते थे । आजके आधुनिक युग्म खुल्ले बाल , पहेरवेश ओर लावण्य दिखाते हुवे सब बाहर घूमते है । तो लोग बुरी दृष्टि से देखते है और मौका मिले तो पकड़के बलात्कार करते है ऐसे किस्से आएदिन सुनते है । ऐसी स्थितिमे आसुरी वृति की प्रेत शक्तियां भी साथमे हो जाती है और उनके साथ ही घरमे प्रवेश कर लेती है ।
पहले के समयमे ऋषिमुनियों ने गोत्र मुजब आपके देहमे जो स्थित है वो ऊर्जा शक्तिओ को ही कुलदेवी , इष्टदेव,गोत्रीज देव स्वरूप स्थापित करवाया था और सतयुग से आजतक उनकी उपासना होती थी और उनका रक्षा कवच था तो परिवार की हर आसुरी शक्तिओ से रक्षा होती थी । कलियुग व्याप्त होते ही अनेक तर्कटि सम्प्रदाय आये । लोगो पर हावी रहने केलिए भव्य मंदिरों , भ्रमजाल की ऐसी भाषा की बुद्धिजीवी लोग भी भ्रमित होकर अपनी मूल परंपराओं का त्याग करके ऐसे जुठे सम्प्रदाय ओर उनके धर्माचार्यो के दीवाने बन गए । रक्षा कवच हट गया और आसुरी शक्तिओ को घरमे प्रवेश मिल गया। जिस सम्प्रदाय ओर उनके महापुरुषों को भगवान का दरज्जा दे रहे हो कभी कोई भूत , प्रेत बाधा का कार्य करने कहिए ओर देखिए वो कितने बड़े महापुरुष है ।
ऐसा लिखना तो अच्छा नही लगता पर कही लोगो को देखकर जो अनुभूत हुवा की अनेक परिवार मूल ऋषि गोत्र से नही है पर ऐसी आसुरी शक्तिओ से चले वंश है । अब इनकेलिये कौन कुलदेवी ओर कौन इष्टदेव कैसे तय करे और उनको क्या मार्ग दिखाए ?
ऐसे तो आसुरी शक्तिओ ओर तंत्रबाधा से मुक्ति केलिए उग्र देवी देवताओं की उपासना के अनेक विधान है । दुर्गा माता , कालीमाता , हनुमानजी , भैरव विगेरे उपासना है । पर समस्या से ग्रस्त व्यक्ति या परिवार विधान करवाते करवाते थक चुके होते है और अब किसी विधानमे उनको पूर्ण विस्वास नही होता । और ये तो सहज ही है कि भाव के बिगैर किया कोई विधान , मंत्र , यज्ञ , पूजा कभी फलदायी नही होता। पर फिर भी ऐसे निराश लोग मुक्ति पा सके और स्वयं ही बिना खर्च कर सके ऐसा कुछ सरल विधान दिखाते है । सम्भव है अगर भाव हुवा तो अवश्य ही फलदायी होगा।
ऊपर बताई कोई भी समस्या से पीड़ित परिवार अति शीघ्र ही रुद्राक्ष धारण करे। घरके हरेक परिवार जन को रुद्राक्ष धारण करवा दीजिए । आसुरी शक्तियां भागने लगेगी । हो सके तो नित्य या संभव न हो तो सप्ताहमे एकबार शिवलिंग की दक्षिण दिशा पर बैठकर शिवलिंग पर जल अभिषेक कीजिये और मिल सके तो बिल्वपत्र शिवलिंग पर धाराएं । शिवलिंग के सन्मुख बैठकर शिव गायत्री मंत्र के 11 जाप कीजिये ।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहितन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
महादेव का गायत्री मंत्र है सर्वशक्तिशाली माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति इसका नियमित रूप से जाप करता है उसे हर सुख की प्राप्ति होती है उसके जावन में शांति बनी रहती है।
शिवजी को वंदन करके अपनी समस्या से मुक्ति की प्रार्थना करे।
शिवलिंग पर धाराएं बिल्वपत्र में से एक बिल्वपत्र घर लेकर जलपत्रमे डाल दीजिए ताकि घरके हरेक सदस्य को शिवजी का चरणामृत मिले।
घरमे नित्य कुलदेवी के नाम दीप जलाए।
हरदिन सूर्यास्त के बाद आप जब भी घर आने का जो समय हो तब घर पहुचकर हनुमानजी के नाम एक तेल का दिया लगाइए। आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा का एक पाठ कीजिये । पाठ करने के बाद 20 मिनिट तक आंखे बंद करे और रदयमे हनुमानजी बैठे है ऐसा ध्यान करिए ।ध्यान कीजिये कि हनुमानजी सीताराम सीताराम नाम का जाप कर रहे है और आप भी हनुमानजी के साथ साथ सीताराम सीताराम नाम का जाप कीजिये। सतत 20 मिनिट तक हनुमानजी का ध्यान और उनके साथ साथ सीताराम नाम जाप।
जाप के बाद हनुमानजी के समक्ष अपनी समस्या और उनसे कैसे मुक्ति मिल सके ये प्रार्थना कीजिये । थोड़े ही दिनमे हनुमानजी आप केलिए जो श्रेष्ठ होगा ऐसा संजोग पैदा करेंगे । जो आप केलिए कल्याणकारी होगा आपको वो मिलने लगेगा ।
ये विधान ऐसे सरल लगेगा पर ये शीघ्र फलदायी होते हमने कही बार देखा है । पूर्ण श्रद्धा से कीजिये
महादेव आप सभी धर्मप्रेमी जनो पर कृपा करें यही प्रार्थना सह .. श्री मात्रेय नमः
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