हजारों यथार्थ सत्य दृष्टांतों में से आप लोगों को दो दृष्टांत बताने की कोशिश करता हूँ !
1 :- भगवान राम जब लंका पर जाने के लिए समुन्द्र (सागर ) से रास्ता मांग रहे थे, तब सागर ने रास्ता नही दिया!
तब रामचंद्र जी को क्रोध आया और समुन्द्र को सुखाने के लिए अपनी कमान से बाण निकाल लिया (बाण यहां प्रतीक है)
लेकिन उन्होंने कृत्या नामक महा शक्ति का आवाहन कर लिए संकल्प ले लिए समुद्र को सुखाने के लिए)
जैसे ही भगवान राम समुन्द्र पर कृत्या का प्रहार करने लगे सागर ( सगर ) समुन्द्र के रूप में श्रापित पड़े हुये थे,
अनंत वर्षों से अचानक समुन्द्र में से प्रकट हो गये,
और कहने लगे हे राम तुम ये क्या कर रहे हो, क्या करने जा रहे हो,
मै तुम्हारे तात का भी तात हूँ सगर जो इस समुद्र के रूप में श्रापित पड़ा हुआ हूँ,
अगर ये कृत्या नामक की शक्ति का प्रहार समुन्द्र पर कर दिया तो अनंत जीव-जंतु नष्ट हो जायेगे पहले से ही तुम्हारा वंश श्रापित है,
कोई सागर के रूप में तो कोई पर्वत कोई नदी के रूप में इस धरती पर पड़े हुये है, औऱ अपनी मुक्ति के लिए तड़प रहे है,
हे राम तुम हमारी मुक्ति के लिए पित्रेष्ठि साधना अनुष्ठान करो,
औऱ इस कृत्या नामक शक्ति को उत्तर की तरफ़ हिमालय में एक विशाल कुंड है,
जिसमे एक राक्षस रहता है, वो किसी भी जीव जंतु को जीवित नही छोड़ता है,
तुम इस संकल्प की दिशा मोड़ कर उस तालाब पर छोड़ दो , जिससे उस राक्षस का अंत हो जायेगा और जीव हत्या बंद हो जायेगी !
जो नेपाल उसी तालाब में बसा हुआ है !
हे राम तुम्हारी सेना में दो विचित्र शक्ति लिए हुये दो बालक है, वो किसी भी पत्थर को छुएंगे वह पत्थर पानी मे तैरना शुरू कर देंगे !
तब जाकर राम ने रामेश्वरम शिवलिंग की स्थापना कर अपने पितृ दोष मुक्ति के लिए साधना अनुष्ठान किया !
2 :- भगवान श्री कृष्ण के 47 वर्ष की अवस्था तक कोई भी संतान नही थी !
*रुक्मणि कहती है, हे प्रभु आप तो द्वारका धीश हो, त्रिलोकी नाथ हो, तीनों लोकों के स्वामी हो !
मुझे एक संतान दे दो , वर्ना ये संसार मुझे बाँझ की संज्ञा देगा,
मै बिन संतान के ये शरीर नही छोड़ना चाहाती,
वार्ना लोग मुझे कलंकित कर देंगे!
तब भगवान श्री कृष्ण कहते है, हे देवी में तीनों लोक तुम्हें दे सकता हूँ लेकिन संतान में तुम्हें नही दे सकता,
तब रुक्मणि कहती है प्रभु कोई तो उपाय होगा,
तब श्री कृष्ण और रुक्मणि अपने गुरु सांदीपनि ऋषि के आश्रम उज्जैन जाते है,
(संदीपिनी ऋषि) कहते है, हे कृष्ण, तुम्हारे पितृ ही तुम्हे संतान प्रदान कर सकते है,
इसलिए तुम पितृ दोष निवारण औऱ आशीर्वाद प्राप्ति अनुष्ठान करो,
भगवान श्री कृष्ण ने अपने गुरु सांदीपन ऋषि के बताए अनुसार 3 दिवसीय पित्रेष्ठि साधना अनुष्ठान किया उसके बाद हि (प्रधुम्न) का जन्म हुआ !
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